Tuesday, August 27, 2013

कहानी परियों की

बिटिया
सुनती नहीं
कहानी परियों की ।

गुड़िया से न प्यार
न उसके दूल्हे से,
न कोई अनुराग है
चकिया-चूल्हे से ;
बाद जनम के
कितने सावन बीत गए,
कभी न देखा
उसे झूलते झूले से  ।

करती है
वह बात
उड़नतश्तरियों की ।

पढ़ती है लिखती है
कॉलेज जाती है,
कम्प्यूटर पर
उँगली तेज चलाती है ;
दादी माँ की सभी
हिदायत सुन-सुन कर,
हौले से जा पास
उन्हें समझाती है ।

अर्जी देती
बड़ी-बड़ी
नौकरियों की ।

है उसमें विश्वास
गगन छू लेने का,
खुद होकर मजबूत
बहुत कुछ देने का ;
तूफानों में भी
कश्ती फँस जाए तो,
अपने दम पर
साहिल तक खे लेने का ।

है मोहताज
नहीं बेटी
देहरियों की ।

(28 अगस्त, 2013) 

5 comments:

  1. उत्तम रचना . आपकी रचना को " हिंदी ब्लोगर्स चौपाल """http://hindibloggerscaupala.blogspot.com/"> {शुक्रवार} 4/10/2013 मैं शामिल किया गया हैं ताकि आपकी इस उत्तम रचना को अधिक से अधिक लोग पढ़ पाए ...


    कृपया आप भी अवलोकनार्थ पधारे .... प्रणाम

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  2. वाह ...बहुत सुंदर रचना

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  3. सभी प्रशंसकों का हार्दिक आभार

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