Friday, October 3, 2014

लेकिन कन्या ---

भौजी पुत्र चाह में
पूरे नौ दिन
व्रत नवरात्र रहीं,
घी का दीप जलाकर
श्रद्धा की
गंगा में खूब बहीं ;

पूर्णाहुति के लिए
खीर संग
तलीं पूड़ियाँ खिली-खिली,

लेकिन कन्या नहीं मिलीं।

हरियाणा के
कई घरों में
पुत्रों से परिवार भरा,
किंतु कमी
बस एक चीज की
कई गले न हार पड़ा;

पढ़े-लिखे हैं
भैंस बँधी हैं
और नौकरी मिली भली,

पर दुलहनियाँ नहीं मिली।

ममता माँ की
प्रेयसि का भी
प्यार मिला तरुणाई में,
पर जीवन भर
बँधा न धागा
सूनी पड़ी कलाई में ;

दादी का
आशीष मिला
माँ दूधों-पूतों खूब फलीं

लेकिन बहना नहीं मिली।

( 3 अक्तूबर, 2014)
दशहरे की शाम

Tuesday, May 27, 2014

हम कैसे माने कि --

माना कि आप आज
दुनिया में छा गए,
हम कैसे मानें कि
अच्छे दिन आ गए।

शेयरों के भाव भले
आसमान छू रहे,
सूर्य-चांद-तारे भी
आँगन में चू रहे ;

भाजी के भाव मगर
नीचे न आ गए,
तो कैसे मानें कि
अच्छे दिन आ गए।

हो सकता है सुधरें
सोने के स्वर ऐंठे,
संभव है रुपया भी
डॉलर को चढ़ बैठे ;

लेकिन हम दाल-भात
जब तक न पा गए,
तो कैसे मानें कि
अच्छे दिन आ गए।

बिटिया की शादी में
बजनी है शहनाई,
सिर चढ़के नाच रही
है निर्दय महंगाई;

अरमानों की पूँजी
टैक्स मियाँ खा गए,
हम कैसे मानें कि
अच्छे दिन आ गए।

दिल्ली में दीवाली
जैसी हर शाम है,
दुनिया भी आ करके
ठोंकती सलाम है ;

जब तक न दिखें
गाँव-गाँव जगमगा गए,
हम कैसे मानें कि
अच्छे दिन आ गए।

(27 मई, 2014)


Wednesday, May 21, 2014

राजपथ

राजपथ पर 
कंटकों की 
क्यारियाँ हैं ।

खूबसूरत स्वप्न सा 
चरितार्थ है,
किंतु इसका गूढ़ कुछ
निहितार्थ है।

चल संभलकर
राह में
दुश्वारियां हैं।

सुख नहीं सत्ता सदा
विषपान है,
जो इसे हल्के से ले
नादान है।

विवादों से
इसकी पक्की
यारियाँ हैं।

जो तुम्हें कहना था
वो तुम कह चुके,
जो किले मुश्किल थे
वो भी ढह चुके।

अब नया
गढ़ने की
जिम्मेदारियाँ हैं।

जो सगे उनसे भी
है प्रतिद्वंद्विता,
रेस में शामिल जिन्हें
कहते पिता।

लोग तकते
अपनी-अपनी
बारियाँ हैं।

- ओमप्रकाश तिवारी

Friday, November 29, 2013

क्षमा करो सरदार

क्षमा करो सरदार
कहाँ से
लोहा लाएँ हम !

वर्षों पहले
बेच चुके हम
बाबा वाले बैल,
आज किराये
के ट्रैक्टर से
होते हैं सब खेल;

मुठिया पकड़
खेत में घूमे,
किसमें इतना दम !

न बढ़ई की
खट-खट गूँजे
न कुछ गढ़े लुहार,
जाने कब की
जंग खा चुकी
है कुदाल की धार;

भला चलाए
कौन फावड़ा,
कमर गई है जम !

दूध पाउडर का
लाते हैं
नहीं पालते भैंस,
आजी बिन
कंडा न पथता
घर में जलती गैस;

खुरपा-खुरपी
वाला भी अब
काम रह गया कम !

हाथ कबाड़ी
के बेचे सब
खेती के औजार,
अधिया पर
दे खेत शहर में
करते लोग बेगार;

पाले हैं
तो पाले रहिए,
आप प्रगति का भ्रम !

(29 नवंबर, 2013)

नोटः गुजरात में स्टैच्यू ऑफ यूनिटी के निर्माण हेतु देश भर से कृषि औजार इकट्ठा करने की बात हो रही है। इसी संदर्भ को ध्यान में रखते हुए सरदार पटेल से क्षमा याचना सहित इस कविता का उद्भव हुआ है।


Saturday, November 9, 2013

त्राहिमाम्


त्राहिमाम् !प्रभु त्राहिमाम् !!

देखा आज़ादी का अनुभव,
देखा नेताओं का उद्भव,
तब रानी एक अकेली थी,
अब राजा आते हैं नव-नव ;

हम तो जस के तस हैं गुलाम !

कलम बंद कर बैठा अफसर,
ऊँघ रहा है सारा दफ्तार,
गाँधी के दर्शन हो जाएँ,
तो चपरासी ही ताकतवर ;

हाउसफुल नंगों से हमाम !

पति-पत्नी का परिवार बचा,
वह भी तूने क्या खूब रचा,
दोनों मोबाइल से चिपके,
हैं उसपर उँगली रहे नचा ;

इंटरनेट से होती सलाम !


(09 नवंबर, 2013)

अखबारों में समाचार है

अखबारों में समाचार है,
उल्लू बैठा डार-डार है ।

देश दिखाई देता दुखिया,
लूट सके जो वो है सुखिया,
लाचारी में शीश झुकाए,
बैठा दिखे मुल्क का मुखिया ;

चुने हुए राजा-रानी से,
लोकतंत्र ही शर्मसार है ।

एक समय था गुल्ली-डंडा,
खेल बना अब चोखा धंधा,
रहो खेलते मनमानी से,
जब तक गले पड़े न फंदा;

राजनीति के खिलाड़ियों से,
खेल स्वयं ही गया हार है।

विकीलीक्स का नया खुलासा,
सुनकर होती बड़ी निराशा,
चौसर भले बिछी हो अपनी,
पश्चिम फेंक रहा है पासा;

शायद इसीलिए दिखती अब,
लोकतंत्र की मुड़ी धार है।

( 09 नवंबर, 2013)

Tuesday, August 27, 2013

कहानी परियों की

बिटिया
सुनती नहीं
कहानी परियों की ।

गुड़िया से न प्यार
न उसके दूल्हे से,
न कोई अनुराग है
चकिया-चूल्हे से ;
बाद जनम के
कितने सावन बीत गए,
कभी न देखा
उसे झूलते झूले से  ।

करती है
वह बात
उड़नतश्तरियों की ।

पढ़ती है लिखती है
कॉलेज जाती है,
कम्प्यूटर पर
उँगली तेज चलाती है ;
दादी माँ की सभी
हिदायत सुन-सुन कर,
हौले से जा पास
उन्हें समझाती है ।

अर्जी देती
बड़ी-बड़ी
नौकरियों की ।

है उसमें विश्वास
गगन छू लेने का,
खुद होकर मजबूत
बहुत कुछ देने का ;
तूफानों में भी
कश्ती फँस जाए तो,
अपने दम पर
साहिल तक खे लेने का ।

है मोहताज
नहीं बेटी
देहरियों की ।

(28 अगस्त, 2013)